भड़ली नवमी 2026 एक नज़र में
मुख्य तिथि: बुधवार, 22 जुलाई 2026
पक्ष एवं मास: आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी
नवमी प्रारंभ: 22 जुलाई 2026, सुबह 5:16 बजे
नवमी समाप्त: 23 जुलाई 2026, सुबह 7:03 बजे
सूर्योदय: लगभग सुबह 5:36 बजे
सूर्यास्त: लगभग शाम 7:18 बजे
अन्य नाम: भड़ल्या नवमी, भड़रिया नवमी, भदरिया नवमी और कन्दर्प नवमी
मुख्य धार्मिक संबंध: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का नवमी दिवस
लोकमान्यता: मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त
मुख्य उपास्य: देवी दुर्गा या पार्वती; वैष्णव परंपरा में विष्णु-लक्ष्मी
विवाह प्रार्थना: शिव-पार्वती संयुक्त पूजा
सरल देवी मंत्र: ॐ दुं दुर्गायै नमः
सरल विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
देवी आरती: जय अम्बे गौरी
विष्णु आरती: ॐ जय जगदीश हरे
तिथि और देवता को लेकर आवश्यक स्पष्टीकरण
भड़ली नवमी की तिथि स्थान और सूर्योदय के अनुसार कुछ नगरों में एक दिन अलग दिखाई जा सकती है। इस लेख में नई दिल्ली के पंचांग को आधार बनाकर 22 जुलाई 2026 की तारीख दी गई है।
भड़ली नवमी के लिए किसी एक विशिष्ट देवता की सर्वमान्य पूजा निर्धारित नहीं है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी होने के कारण देवी दुर्गा या पार्वती की पूजा प्रमुख है।
देवशयनी एकादशी से पहले का समय होने के कारण कई वैष्णव परिवार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। विवाह या दांपत्य-संबंधी प्रार्थना में शिव-पार्वती की पूजा भी प्रचलित है।
इसी कारण भड़ली नवमी की कोई एक अलग, सर्वमान्य आरती या मंत्र नहीं मिलता। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और आराध्य के अनुसार देवी, विष्णु-लक्ष्मी या शिव-पार्वती मंत्र चुन सकते हैं।
इस लेख में
- भड़ली नवमी क्या है?
- भड़ली नवमी 2026 की सही तारीख
- नई दिल्ली के लिए तिथि और मुहूर्त
- क्या पूरे दिन अबूझ मुहूर्त रहता है?
- भड़ली नवमी पर किस देवता की पूजा करें?
- घर पर सरल पूजा-विधि
- विवाह एवं मांगलिक कार्यों की विशेष पूजा
- प्रमुख मंत्र और उनका सही अवसर
- भड़ली नवमी पर कौन-सी आरती करें?
- पूजा और मांगलिक कार्य की सामग्री
- कौन-कौन से शुभ कार्य किए जाते हैं?
- विवाह के लिए व्यावहारिक checklist
- पारंपरिक आध्यात्मिक उपाय
- दिनभर की सरल साधना-योजना
- क्या करें और किन बातों से बचें?
- NityaPuja पर संबंधित मार्गदर्शिकाएँ
- सामान्य प्रश्न, निष्कर्ष और अस्वीकरण
1. भड़ली नवमी क्या है?
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। यह तिथि उत्तर और पश्चिम भारत की कई लोकपरंपराओं में मांगलिक कार्यों के लिए विशेष मानी जाती है।
यह दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी से भी जुड़ा है। इसलिए देवी दुर्गा, माता पार्वती और आदिशक्ति की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
भड़ली नवमी देवशयनी एकादशी से कुछ दिन पहले आती है। धार्मिक परंपरा में देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास आरंभ माना जाता है और विवाह जैसे कई मांगलिक संस्कारों में विराम रखा जाता है।
इसी कारण भड़ली नवमी को चातुर्मास से पहले विवाह, सगाई, गृहप्रवेश और अन्य लंबित शुभ कार्य करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना गया।
सरल अर्थ:
भड़ली नवमी कोई एक देवता का जन्मोत्सव नहीं, बल्कि आषाढ़ शुक्ल नवमी का एक क्षेत्रीय मांगलिक पर्व और गुप्त नवरात्रि का नवमी दिवस है।
2. भड़ली नवमी के अन्य नाम
क्षेत्र और स्थानीय बोली के अनुसार इस तिथि के नाम तथा उच्चारण में अंतर मिलता है।
भड़ली नवमी
भड़ल्या नवमी
भड़रिया नवमी
भदरिया नवमी
बदरिया नवमी
कन्दर्प नवमी
“कन्दर्प नवमी” नाम के कारण कुछ क्षेत्रीय परंपराएँ इस दिन को प्रेम, विवाह और दांपत्य से जोड़ती हैं। कामदेव को भड़ली नवमी का एकमात्र मुख्य देवता मानना सर्वमान्य परंपरा नहीं है।
3. भड़ली नवमी 2026 कब है?
मुख्य तिथि
बुधवार, 22 जुलाई 2026
आषाढ़ शुक्ल नवमी
| पंचांग विवरण |
समय |
| नवमी तिथि प्रारंभ |
22 जुलाई, सुबह 5:16 बजे |
| नवमी तिथि समाप्त |
23 जुलाई, सुबह 7:03 बजे |
| सूर्योदय |
लगभग सुबह 5:36 बजे |
| सूर्यास्त |
लगभग शाम 7:18 बजे |
| नक्षत्र |
स्वाती; रात लगभग 11:04 बजे तक |
| राहुकाल |
दोपहर 12:27 से 2:10 बजे तक |
स्थान-विशिष्ट तिथि:
पश्चिम बंगाल या अन्य नगरों के कुछ पंचांग इसे 23 जुलाई दिखा सकते हैं। विवाह या बड़े संस्कार के लिए कार्यक्रम वाले शहर का स्थानीय पंचांग ही देखें।
4. भड़ली नवमी 2026 का शुभ मुहूर्त
भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, फिर भी पूजा या किसी नए छोटे कार्य की शुरुआत के लिए शुभ चौघड़िया चुना जा सकता है।
| समय |
चौघड़िया |
उपयोग |
| सुबह 5:36–7:19 |
लाभ |
पूजा, संकल्प और सामान्य शुभ शुरुआत |
| सुबह 7:19–9:02 |
अमृत |
चौघड़िया अनुसार शुभ; परिवार की मुहूर्त-पद्धति भी देखें |
| सुबह 10:44–दोपहर 12:27 |
शुभ |
सामान्य शुभ कार्य; राहुकाल से पहले समाप्त करें |
| शाम 3:52–5:35 |
चर |
यात्रा, चल कार्य और सामान्य शुरुआत |
| शाम 5:35–7:18 |
लाभ |
सायंकालीन पूजा, आरती और शुभ संकल्प |
अभिजीत मुहूर्त पर सावधानी:
पंचांग में अभिजीत समय लगभग दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक आता है, लेकिन 22 जुलाई बुधवार है। कई मुहूर्त परंपराएँ बुधवार के अभिजीत को मांगलिक कार्यों के लिए अनुशंसित नहीं मानतीं। साथ ही राहुकाल 12:27 बजे शुरू हो जाता है। इसलिए इसे विवाह के लिए मुख्य मुहूर्त न मानें।
विवाह का सटीक समय:
विवाह संस्कार के लिए केवल चौघड़िया पर्याप्त नहीं होता। लग्न, नक्षत्र, वर-वधू की जन्मपत्री, स्थानीय परंपरा और उपलब्ध पुरोहित के अनुसार समय निश्चित करें।
5. भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त क्यों कहते हैं?
“अबूझ मुहूर्त” का सामान्य अर्थ ऐसा दिन है जिसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है और छोटे मांगलिक कार्यों के लिए हर बार अलग मुहूर्त खोजने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
भड़ली नवमी चातुर्मास से पहले आने वाले अंतिम प्रमुख मांगलिक अवसरों में गिनी जाती है। इसलिए जिन परिवारों को सामान्य विवाह मुहूर्त नहीं मिल पाता, वे इस दिन को चुनते रहे हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि पूरे दिन का प्रत्येक मिनट सभी प्रकार के कार्यों और प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त है।
अबूझ का व्यावहारिक अर्थ
सामान्य शुभ कार्यों के लिए दिन को व्यापक रूप से अनुकूल मानना।
अबूझ का अर्थ यह नहीं
कानूनी नियम, स्वास्थ्य, सहमति, सुरक्षा, व्यक्तिगत परिस्थितियाँ और संस्कार-विधि छोड़ देना।
6. भड़ली नवमी पर किस देवता की पूजा करें?
| उपास्य |
परंपरा या कारण |
किस संकल्प के लिए? |
| देवी दुर्गा |
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी |
साहस, संरक्षण और साधना की पूर्णता |
| माता पार्वती |
मंगल, विवाह और गृहस्थ संतुलन की क्षेत्रीय परंपरा |
उचित जीवनसाथी, धैर्य और पारिवारिक सौहार्द |
| भगवान विष्णु |
देवशयनी एकादशी से पहले की वैष्णव उपासना |
संरक्षण, धर्म और शुभ कार्य की सफलता की प्रार्थना |
| माता लक्ष्मी |
लक्ष्मी-नारायण संयुक्त पूजा |
गृहस्थ व्यवस्था, अन्न और जिम्मेदार समृद्धि |
| शिव-पार्वती |
विवाह और दांपत्य प्रार्थना |
सम्मानपूर्ण संबंध, संवाद और संतुलन |
| भगवान गणेश |
प्रत्येक मांगलिक कार्य का आरंभ |
विवेक और बाधाओं के समाधान की प्रार्थना |
घर की पूजा के लिए सरल चयन:
गणेशजी का स्मरण करके देवी दुर्गा या माता पार्वती की पूजा करें। घर में वैष्णव परंपरा हो तो लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें। विवाह का संकल्प हो तो शिव-पार्वती को संयुक्त रूप से पूजें।
7. घर पर भड़ली नवमी की सरल पूजा-विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थान साफ करें।
- भगवान गणेश, देवी दुर्गा या पार्वती और लक्ष्मी-नारायण का चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक जलाकर “ॐ गं गणपतये नमः” 11 बार जपें।
- जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपनी पूजा या मांगलिक कार्य का संकल्प लें।
- देवी को कुमकुम, अक्षत, पुष्प, चुनरी या उपलब्ध सात्त्विक सामग्री अर्पित करें।
- भगवान विष्णु को पीला पुष्प, तुलसीदल और फल अर्पित करें। तुलसी उपलब्ध न हो तो केवल पुष्प अर्पित करें।
- विवाह प्रार्थना हो तो शिव-पार्वती के सामने “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” का जप करें।
- अपने आराध्य के अनुसार देवी या विष्णु मंत्र 11 अथवा 108 बार जपें।
- फल, मिश्री, खीर या घर में बना सात्त्विक भोजन नैवेद्य रखें।
- देवी पूजा में “जय अम्बे गौरी” और विष्णु पूजा में “ॐ जय जगदीश हरे” आरती करें।
- शुभ कार्य में सही निर्णय, सहमति, विवेक और जिम्मेदारी की प्रार्थना करें।
- प्रसाद परिवार में बाँटें और क्षमता के अनुसार भोजन या आवश्यक वस्तु का दान करें।
8. विवाह या सगाई से पहले शिव-पार्वती पूजा
- शिव-पार्वती या उमा-महेश्वर का चित्र स्वच्छ चौकी पर रखें।
- घी का दीपक जलाकर गणेशजी का स्मरण करें।
- शिवजी को जल, श्वेत चंदन, अक्षत और बिल्वपत्र अर्पित करें।
- माता पार्वती को कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” 108 बार जपें।
- विवाह केवल होने की नहीं, बल्कि सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और अनुकूल संबंध की प्रार्थना करें।
- परिवारों के बीच आवश्यक स्वास्थ्य, आर्थिक, कानूनी और व्यावहारिक जानकारी स्पष्ट रखें।
- भगवान शिव की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
संयुक्त शिव-पार्वती पूजा से पहले
शिव पूजन एवं अभिषेक विधि
देख सकते हैं।
9. भड़ली नवमी के प्रमुख मंत्र
1. गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
अवसर: पूजा, विवाह, गृहप्रवेश या किसी भी नए कार्य के आरंभ में।
2. देवी दुर्गा मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
अवसर: गुप्त नवरात्रि नवमी, देवी-पूजा, साहस और संरक्षण की प्रार्थना।
3. माता पार्वती मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः॥
अवसर: विवाह, परिवार, आत्मसंयम और उचित निर्णय की प्रार्थना।
4. उमा-महेश्वर संयुक्त मंत्र
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
अवसर: विवाह, सगाई, दांपत्य-सौहार्द और शिव-पार्वती संयुक्त पूजा।
5. भगवान विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
अवसर: वैष्णव पूजा, शुभ कार्य, संरक्षण और देवशयनी एकादशी से पहले श्रीहरि का स्मरण।
6. लक्ष्मी-नारायण मंत्र
ॐ लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः॥
अवसर: गृहस्थ जीवन, गृहप्रवेश, व्यापार या आर्थिक जिम्मेदारी की शुभ शुरुआत।
7. सर्वमंगल देवी प्रार्थना
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अवसर: पूजा के समापन, शुभ कार्य के आरंभ और परिवार की मंगलकामना में।
जप संख्या:
सामान्य गृह पूजा में किसी एक मुख्य मंत्र का 11, 27 या 108 बार जप पर्याप्त है। सभी मंत्र एक साथ पढ़ना आवश्यक नहीं है।
10. भड़ली नवमी पर कौन-सी आरती करें?
भड़ली नवमी की कोई अलग सर्वमान्य आरती नहीं है। पूजा में चुने गए देवता के अनुसार आरती करें।
| पूजा |
उपयुक्त आरती |
कब करें? |
| देवी दुर्गा या पार्वती पूजा |
जय अम्बे गौरी |
देवी मंत्र और नैवेद्य के बाद |
| विष्णु-लक्ष्मी पूजा |
ॐ जय जगदीश हरे |
विष्णु मंत्र और तुलसी अर्पण के बाद |
| शिव-पार्वती पूजा |
ॐ जय शिव ओंकारा |
उमा-महेश्वर मंत्र के बाद |
शिव-पार्वती पूजा में संपूर्ण
ॐ जय शिव ओंकारा आरती
पढ़ सकते हैं।
आरती के बाद समापन प्रार्थना
हे देवी माँ, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी! हमारे मन, वाणी और कर्म को मंगलमय बनाइए। हमें शुभ कार्य में सही निर्णय, आपसी सम्मान, सत्य, धैर्य और जिम्मेदारी प्रदान कीजिए। हमारी इच्छा तभी पूर्ण हो, जब वह सभी के हित और धर्म के अनुकूल हो।
11. भड़ली नवमी पूजा सामग्री
☐ गणेशजी का चित्र या प्रतिमा
☐ देवी दुर्गा या पार्वती का चित्र
☐ लक्ष्मी-नारायण का चित्र
☐ स्वच्छ चौकी और वस्त्र
☐ घी का दीपक और बत्ती
☐ जल और गंगाजल
☐ कुमकुम और अक्षत
☐ हल्दी और चंदन
☐ लाल, पीले या उपलब्ध पुष्प
☐ तुलसीदल, वैष्णव पूजा के लिए
☐ धूप या गुग्गुल धूप
☐ कपूर
☐ फल, मिश्री या खीर
☐ दान के लिए अन्न या उपयोगी वस्तु
सामग्री कम हो तो:
एक दीपक, जल, अक्षत, पुष्प और किसी एक मुख्य मंत्र से भी पूजा की जा सकती है। महँगी या बड़ी सामग्री भड़ली नवमी पूजा की अनिवार्य शर्त नहीं है।
12. भड़ली नवमी पर कौन-से शुभ कार्य किए जाते हैं?
| शुभ कार्य |
आवश्यक सावधानी |
| विवाह |
कानूनी आयु, स्वतंत्र सहमति, पारिवारिक संवाद और संस्कार का सटीक समय |
| सगाई या रोका |
जल्दबाजी में अंतिम निर्णय न लें; अपेक्षाएँ और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करें |
| गृहप्रवेश |
निर्माण सुरक्षा, बिजली, पानी, स्वच्छता और स्थानीय पूजा-विधि जाँचें |
| मुंडन या नामकरण |
बच्चे के स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें |
| नया व्यवसाय |
पंजीकरण, कर, अनुबंध, पूँजी और वास्तविक बाजार योजना तैयार रखें |
| संपत्ति या वाहन खरीद |
दस्तावेज, स्वामित्व, ऋण, बीमा और तकनीकी जाँच पूरी करें |
| शिक्षा या नया कौशल |
पूजा के बाद वास्तविक अध्ययन-योजना और समय-सारणी बनाएँ |
13. भड़ली नवमी विवाह Checklist
A. विवाह तय करने से पहले
☐ दोनों व्यक्तियों की स्वतंत्र सहमति
☐ कानूनी विवाह आयु की पुष्टि
☐ शिक्षा, कार्य और निवास संबंधी अपेक्षाएँ स्पष्ट
☐ आर्थिक जिम्मेदारियों पर बातचीत
☐ आवश्यक स्वास्थ्य जानकारी साझा
☐ परिवारों की मुख्य अपेक्षाएँ स्पष्ट
☐ किसी प्रकार का दबाव या छिपी शर्त नहीं
B. मुहूर्त और आयोजन
☐ नई दिल्ली का स्थानीय पंचांग जाँचा
☐ पुरोहित से संस्कार का मुख्य समय तय किया
☐ राहुकाल और आयोजन समय का समन्वय
☐ विवाह-स्थल की उपलब्धता
☐ मानसून के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
☐ विवाह पंजीकरण के दस्तावेज
☐ बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा
C. धार्मिक तैयारी
☐ गणेश पूजन
☐ शिव-पार्वती पूजन
☐ उमा-महेश्वर मंत्र
☐ नैवेद्य और प्रसाद
☐ आरती
☐ दान या सेवा का संकल्प
14. भड़ली नवमी के पारंपरिक आध्यात्मिक उपाय
ये उपाय भक्ति, अनुशासन और सकारात्मक व्यवहार के लिए हैं। इन्हें विवाह, धन या किसी समस्या के निश्चित समाधान की गारंटी न समझें।
योग्य जीवनसाथी की प्रार्थना
शिव-पार्वती को पुष्प अर्पित करके “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” 108 बार जपें। साथ में अपनी अपेक्षाएँ, सीमाएँ और जीवन-लक्ष्य स्पष्ट लिखें।
दांपत्य में तनाव
दंपति साथ दीपक जलाकर एक-दूसरे की बात बिना टोके सुनने का संकल्प लें। गंभीर विवाद में योग्य परामर्शदाता की सहायता लें।
नए कार्य में बाधा
गणेश मंत्र 21 बार जपकर कार्य को छोटे चरणों, समय-सीमा और जिम्मेदार व्यक्तियों में बाँटें।
घर में स्थिरता और व्यवस्था
लक्ष्मी-नारायण की पूजा के बाद घर के लंबित बिल, दस्तावेज और आवश्यक मरम्मत की सूची बनाकर एक कार्य पूरा करें।
भय और आत्मविश्वास की कमी
“ॐ दुं दुर्गायै नमः” 27 बार जपें और उस दिन एक आवश्यक लेकिन टाला हुआ छोटा कार्य पूरा करें।
सुख-समृद्धि की प्रार्थना
लक्ष्मी-नारायण पूजा के बाद अन्न, पुस्तक, वस्त्र या उपयोगी सामग्री का दान करें। साथ में आय और खर्च की वास्तविक समीक्षा करें।
15. भड़ली नवमी की सरल दिनचर्या
| समय |
क्या करें? |
| सूर्योदय के बाद |
स्नान, दीपक, गणेश स्मरण और मुख्य पूजा |
| प्रातः |
देवी या विष्णु मंत्र, संकल्प और प्रसाद |
| दिन में |
लंबित शुभ कार्य, दस्तावेज या आयोजन की तैयारी |
| दोपहर 12:27–2:10 |
परिवार राहुकाल मानता हो तो नया मुख्य कार्य आरंभ न करें |
| सायंकाल |
दीपक, आरती, परिवार के साथ प्रार्थना और प्रसाद |
| रात्रि |
दिन के निर्णयों की समीक्षा और अगले चरण लिखें |
16. भड़ली नवमी 2026 के उपयोगी Tips
तारीख शहर के अनुसार देखें
दिल्ली से बाहर आयोजन हो तो कार्यक्रम वाले नगर का पंचांग जाँचें।
अबूझ को जल्दबाजी न बनाएँ
केवल शुभ तिथि देखकर बिना पर्याप्त जाँच के विवाह, संपत्ति या ऋण का निर्णय न लें।
मानसून की योजना रखें
जुलाई में बारिश, यातायात और बिजली की समस्या के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाएँ।
एक मुख्य उपास्य चुनें
सभी देवताओं की लंबी पूजा करने के बजाय अपनी परंपरा अनुसार एक स्पष्ट पूजा क्रम रखें।
खाद्य सामग्री न बहाएँ
कम नैवेद्य रखें और बाद में सम्मानपूर्वक प्रसाद के रूप में उपयोग करें।
दान उपयोगी हो
दिखावटी वस्तु के बजाय अन्न, शिक्षा-सामग्री, दवा या वास्तविक आवश्यकता की वस्तु दें।
17. क्या करें और किन बातों से बचें?
क्या करें?
✓ स्थानीय पंचांग की पुष्टि करें
✓ गणेश पूजन से शुरुआत करें
✓ देवी या लक्ष्मी-नारायण पूजा करें
✓ विवाह में स्वतंत्र सहमति सुनिश्चित करें
✓ दस्तावेज और कानूनी आवश्यकताएँ पूरी करें
✓ अन्नदान या उपयोगी सेवा करें
✓ पूजा के साथ व्यावहारिक योजना बनाएँ
किन बातों से बचें?
✕ अबूझ मुहूर्त के नाम पर जल्दबाजी
✕ विवाह में दबाव या अधूरी जानकारी
✕ बिना दस्तावेज जाँचे संपत्ति खरीदना
✕ तांत्रिक प्रयोग या अज्ञात मंत्र
✕ पूजा सामग्री और भोजन की बर्बादी
✕ दीपक या हवन को बिना निगरानी छोड़ना
✕ धार्मिक उपाय को निश्चित परिणाम मानना
19. भड़ली नवमी 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. भड़ली नवमी 2026 कब है?
नई दिल्ली के अनुसार भड़ली नवमी बुधवार, 22 जुलाई 2026 को है।
2. नवमी तिथि कब से कब तक है?
नवमी तिथि 22 जुलाई सुबह 5:16 बजे से 23 जुलाई सुबह 7:03 बजे तक है।
3. कुछ पंचांग 23 जुलाई क्यों दिखाते हैं?
पर्व की तारीख सूर्योदय, क्षेत्र और स्थानीय निर्णय-पद्धति के अनुसार बदल सकती है। इस लेख में नई दिल्ली को आधार बनाया गया है।
4. भड़ली नवमी पर किसकी पूजा होती है?
देवी दुर्गा या पार्वती की पूजा प्रमुख है। वैष्णव परिवार विष्णु-लक्ष्मी और विवाह-संबंधी प्रार्थना में शिव-पार्वती की पूजा करते हैं।
5. क्या भड़ली नवमी की अलग आरती है?
कोई एक सर्वमान्य अलग आरती नहीं है। देवी पूजा में “जय अम्बे गौरी”, विष्णु पूजा में “ॐ जय जगदीश हरे” और शिव-पार्वती पूजा में “ॐ जय शिव ओंकारा” करें।
6. भड़ली नवमी का मुख्य मंत्र कौन-सा है?
कोई एक विशेष सर्वमान्य मंत्र नहीं है। देवी-पूजा में “ॐ दुं दुर्गायै नमः” और विष्णु-पूजा में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जप सकते हैं।
7. क्या भड़ली नवमी पर विवाह किया जा सकता है?
लोकपरंपरा में इसे विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। फिर भी सटीक संस्कार समय, कानूनी आयु, स्वतंत्र सहमति और स्थानीय पुरोहित की सलाह आवश्यक है।
8. क्या कुंडली मिलाना आवश्यक नहीं है?
अबूझ मुहूर्त की परंपरा तिथि को व्यापक रूप से शुभ मानती है। परिवार कुंडली-मिलान मानता हो तो उसे छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। वास्तविक अनुकूलता, सहमति और संवाद अधिक महत्वपूर्ण हैं।
9. क्या पूरे दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं?
दिन को व्यापक रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन विवाह जैसे संस्कार के लिए स्थानीय समय और पुरोहित की सलाह लें। परिवार राहुकाल मानता हो तो 12:27 से 2:10 बजे तक नया कार्य शुरू न करें।
10. क्या इस दिन गृहप्रवेश किया जा सकता है?
लोकपरंपरा में गृहप्रवेश किया जाता है। घर की सुरक्षा, बिजली, जल, स्वच्छता और आवश्यक अनुमति पहले पूरी करें।
11. क्या भड़ली नवमी पर व्रत रखना जरूरी है?
नहीं। पूजा और मंत्र-जप सामान्य सात्त्विक भोजन के साथ किया जा सकता है। व्रत अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।
12. क्या यह गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन है?
भड़ली नवमी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी से जुड़ी है। अलग पूजा-पद्धतियों में नवमी हवन और पारण का क्रम बदल सकता है।
13. क्या इस दिन तांत्रिक साधना करनी चाहिए?
बिना योग्य गुरु के गुप्त या तांत्रिक मंत्र-साधना न करें। सामान्य गृह पूजा में सरल नाम-मंत्र, आरती और प्रार्थना पर्याप्त है।
14. क्या भड़ली नवमी के उपाय निश्चित परिणाम देते हैं?
नहीं। पूजा और मंत्र आध्यात्मिक साधना हैं। विवाह, धन, व्यापार या पारिवारिक समस्या में वास्तविक निर्णय और आवश्यक विशेषज्ञ सहायता भी जरूरी है।
20. निष्कर्ष
भड़ली नवमी बुधवार, 22 जुलाई 2026 को है। नवमी तिथि सुबह 5:16 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:03 बजे समाप्त होगी।
यह आषाढ़ शुक्ल नवमी, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का नवमी दिवस और देवशयनी एकादशी से पहले का प्रमुख मांगलिक अवसर है।
देवी परंपरा में दुर्गा या पार्वती, वैष्णव परंपरा में विष्णु-लक्ष्मी और विवाह-संबंधी प्रार्थना में शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है।
भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, लेकिन बड़े निर्णय केवल धार्मिक तिथि के आधार पर नहीं लेने चाहिए। विवाह में सहमति और अनुकूलता, संपत्ति में दस्तावेज तथा व्यापार में वास्तविक योजना आवश्यक है।
पूजा का सबसे सरल रूप है—एक दीपक, गणेश स्मरण, देवी या विष्णु मंत्र, सात्त्विक नैवेद्य, आरती और उपयोगी दान।
शुभ तिथि के साथ शुभ विचार, स्पष्ट सहमति और जिम्मेदार कर्म भी आवश्यक हैं।
सर्वमंगल मांगल्ये
धार्मिक, पंचांग एवं व्यावहारिक अस्वीकरण
इस लेख की तिथि और समय नई दिल्ली के पंचांग के आधार पर दिए गए हैं। सूर्योदय और क्षेत्रीय निर्णय-पद्धति के कारण अन्य नगरों में पर्व की तारीख या समय अलग हो सकता है।
भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त मानना एक धार्मिक और क्षेत्रीय परंपरा है। विवाह, गृहप्रवेश या अन्य संस्कार की विस्तृत विधि परिवार, समुदाय और आचार्य के अनुसार बदल सकती है।
इस पर्व के लिए एक विशिष्ट सर्वमान्य देवता, मंत्र या आरती निर्धारित नहीं है। लेख में देवी, वैष्णव और शिव-पार्वती—तीनों प्रमुख परंपराओं को अलग-अलग स्पष्ट किया गया है।
विवाह में दोनों व्यक्तियों की स्वतंत्र सहमति, कानूनी आयु और लागू कानूनों का पालन आवश्यक है। धार्मिक मुहूर्त किसी भी प्रकार के दबाव, बाल विवाह या कानूनी नियम के उल्लंघन को उचित नहीं बनाता।
संपत्ति, वाहन, ऋण, व्यवसाय और निवेश से संबंधित निर्णय आवश्यक दस्तावेज, तकनीकी जाँच और योग्य पेशेवर सलाह के बाद ही लें।
मंत्र, पूजा और पारंपरिक उपाय आध्यात्मिक आस्था से जुड़े हैं। इन्हें विवाह, धन, संतान, स्वास्थ्य या किसी अन्य परिणाम की निश्चित गारंटी न समझें।
तिथि, पूजा-विधि या स्थानीय परंपरा से संबंधित सुधार अथवा सुझाव के लिए कृपया NityaPuja की संपादकीय टीम से संपर्क करें।