मंगला तेरस 2026
NityaPuja माता पार्वती व्रत एवं पूजा मार्गदर्शिका
आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी पर मनाई जाने वाली मंगला तेरस की संपूर्ण हिन्दी मार्गदर्शिका—नई दिल्ली की तारीख एवं पूजा समय, माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना, विजया पार्वती व्रत से संबंध, सरल पूजा-विधि, मंत्र, स्तुति, आरती, व्रत-भोजन, पारंपरिक आध्यात्मिक उपाय और व्यावहारिक सुझाव।
मंगला तेरस 2026 एक नज़र में
मुख्य तारीख: सोमवार, 27 जुलाई 2026
स्थान-आधार: नई दिल्ली, भारत
मास एवं पक्ष: आषाढ़ शुक्ल पक्ष
तिथि: त्रयोदशी या तेरस
त्रयोदशी प्रारंभ: 26 जुलाई, दोपहर लगभग 1:59 बजे
त्रयोदशी समाप्त: 27 जुलाई, शाम लगभग 4:15 बजे
27 जुलाई सूर्योदय: सुबह 5:39 बजे
27 जुलाई सूर्यास्त: शाम 7:15 बजे
प्रातः अमृत चौघड़िया: सुबह 5:39 से 7:21 बजे
शुभ चौघड़िया: सुबह 9:03 से 10:45 बजे
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 बजे
त्रयोदशी के भीतर अंतिम लाभ समय: दोपहर 3:51 से शाम 4:15 बजे
राहुकाल: सुबह 7:21 से 9:03 बजे
मुख्य देवी: मंगलकारी गौरी स्वरूप में माता पार्वती
संयुक्त उपास्य: भगवान शिव और माता पार्वती
सरल मंत्र: ॐ पार्वत्यै नमः
संयुक्त मंत्र: ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः
मुख्य आरती: जय पार्वती माता
क्षेत्रीय नैवेद्य: खीर, फल, मिश्री या सात्त्विक मिष्ठान्न
मंगला तेरस क्या है?
आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी को कुछ उत्तर और पश्चिम भारतीय पंचांगों तथा व्रत-कैलेंडरों में मंगला तेरस कहा जाता है।
यह माता पार्वती के मंगलकारी या गौरी स्वरूप को समर्पित क्षेत्रीय व्रत-परंपरा है। भगवान शिव की पूजा भी इसके साथ की जाती है।
कई क्षेत्रीय कैलेंडरों में इसी दिन को विजया पार्वती या जया पार्वती व्रत के आरंभ से भी जोड़ा जाता है।
इसकी पूजा और भोजन के नियम सभी क्षेत्रों में समान नहीं हैं। परिवार की स्थापित परंपरा हो तो उसे प्राथमिकता दें।
क्या मंगला तेरस हमेशा मंगलवार को होती है?
नहीं। यहाँ “मंगला” शब्द का अर्थ मंगलकारी, कल्याण प्रदान करने वाली माता पार्वती से है।
व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी की तिथि पर आधारित है, किसी निश्चित वार पर नहीं।
वर्ष 2026 में मंगला तेरस सोमवार, 27 जुलाई को है। इसे मंगल ग्रह, मंगलवार के भौम प्रदोष या श्रावण के मंगला गौरी मंगलवार व्रत से न मिलाएँ।
मंगला तेरस और प्रदोष व्रत की तारीख अलग क्यों है?
त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई की दोपहर शुरू होकर 27 जुलाई शाम 4:15 बजे तक रहेगी।
प्रदोष व्रत उस दिन किया जाता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में त्रयोदशी उपस्थित हो। इसलिए इस पक्ष का रवि प्रदोष रविवार, 26 जुलाई को है।
मंगला तेरस का क्षेत्रीय दिन सूर्योदय के समय उपस्थित त्रयोदशी के आधार पर सोमवार, 27 जुलाई माना गया है।
अतः 26 जुलाई की प्रदोष पूजा और 27 जुलाई की मंगला तेरस पूजा को अलग संकल्प और अलग समय से करना अधिक स्पष्ट है।
धार्मिक स्रोत और कथा संबंधी स्पष्टीकरण
“मंगला तेरस” नाम से किसी एक सर्वमान्य प्राचीन पुराण में स्वतंत्र व्रत-अध्याय सामान्यतः उपलब्ध नहीं मिलता।
क्षेत्रीय परंपरा इसे माता पार्वती, गौरी और विजया पार्वती व्रत से जोड़ती है।
इस दिन कथा पढ़नी हो तो माता पार्वती की तपस्या एवं शिव-विवाह का पौराणिक प्रसंग या परिवार में प्रचलित विजया पार्वती व्रत कथा पढ़ी जा सकती है।
इस लेख में
- मंगला तेरस का धार्मिक महत्व
- 2026 की तारीख और नई दिल्ली का मुहूर्त
- मुख्य देवी और उपास्य स्वरूप
- विजया पार्वती व्रत से संबंध
- माता पार्वती की तपस्या का पौराणिक प्रसंग
- कौन व्रत रख सकता है?
- घर पर 15 मिनट की सरल पूजा
- विस्तृत मंगला तेरस पूजा-विधि
- व्रत और भोजन के नियम
- पूजा सामग्री
- प्रमुख मंत्र और स्तुति
- माता पार्वती की आरती
- पारंपरिक आध्यात्मिक उपाय
- अविवाहित और विवाहित श्रद्धालुओं के लिए Tips
- क्या करें और किन बातों से बचें?
- दिनभर का सरल पूजा कार्यक्रम
- पूजा Checklist
- संबंधित NityaPuja मार्गदर्शिकाएँ
- सामान्य प्रश्न, निष्कर्ष और अस्वीकरण
1. मंगला तेरस का धार्मिक महत्व
मंगला तेरस माता पार्वती के मंगलकारी स्वरूप की उपासना का क्षेत्रीय पर्व है। इसमें शिव और शक्ति को संयुक्त रूप से स्मरण किया जाता है।
“मंगल” का अर्थ केवल विवाह या भौतिक सौभाग्य नहीं है। धर्मपरंपरा में मंगल का व्यापक अर्थ है—सही विचार, शांत मन, परिवार में सम्मान, कर्तव्य का पालन और कठिन परिस्थिति में उचित निर्णय।
अविवाहित श्रद्धालु सम्मानपूर्ण एवं अनुकूल जीवनसाथी की प्रार्थना कर सकते हैं। विवाहित श्रद्धालु दांपत्य में संवाद, सहयोग और परिवार के कल्याण का संकल्प ले सकते हैं।
विद्यार्थी, पुरुष और अन्य श्रद्धालु भी माता पार्वती से धैर्य, आत्मसंयम और अच्छे निर्णय की प्रार्थना करते हुए सामान्य पूजा कर सकते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक संदेश:
मंगल केवल पूजा से माँगा जाने वाला परिणाम नहीं, बल्कि सत्य, संयम, जिम्मेदारी और सम्मानपूर्ण व्यवहार से बनाया जाने वाला जीवन है।
2. मंगला तेरस 2026 कब है?
मुख्य व्रत एवं पूजा दिवस
सोमवार, 27 जुलाई 2026
आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी
| पंचांग विवरण | समय |
|---|---|
| त्रयोदशी प्रारंभ | 26 जुलाई, दोपहर लगभग 1:59 बजे |
| त्रयोदशी समाप्त | 27 जुलाई, शाम लगभग 4:15 बजे |
| सूर्योदय | सुबह 5:39 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 7:15 बजे |
| प्रातः अमृत चौघड़िया | सुबह 5:39 से 7:21 बजे |
| शुभ चौघड़िया | सुबह 9:03 से 10:45 बजे |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 से 12:54 बजे |
| त्रयोदशी में लाभ समय | दोपहर 3:51 से शाम 4:15 बजे |
| राहुकाल | सुबह 7:21 से 9:03 बजे |
| यमगण्ड | सुबह 10:45 से दोपहर 12:27 बजे |
| गुलिक काल | दोपहर 2:09 से 3:51 बजे |
पूजा के लिए सबसे सरल समय
प्रातः पूजा
सुबह 5:39 से 7:21 बजे। स्नान, संकल्प, दीपक और मंत्र-जप के लिए सुविधाजनक समय।
दूसरा विकल्प
सुबह 9:03 से 10:45 बजे। माता पार्वती की विस्तृत पूजा और आरती की जा सकती है।
दोपहर का विकल्प
दोपहर 12:00 से 12:54 बजे अभिजित काल है। सामान्य पूजा के लिए इसे चुना जा सकता है।
सायंकालीन पूजा का नियम:
27 जुलाई को त्रयोदशी शाम 4:15 बजे समाप्त हो जाएगी। परिवार में शाम को खीर-भोग या आरती की परंपरा हो तो उसे व्रत-समापन के रूप में करें; इसे त्रयोदशी का मुख्य मुहूर्त न मानें।
3. मंगला तेरस की मुख्य देवी कौन हैं?
| उपास्य स्वरूप | धार्मिक भाव | जीवन-संदेश |
|---|---|---|
| माता मंगला | माता पार्वती का मंगलकारी क्षेत्रीय स्वरूप | जीवन में उचित विचार और शुभ कर्म |
| माता गौरी | तप, धैर्य और पवित्रता का स्वरूप | आत्मसम्मान और संबंधों में विवेक |
| भगवान शिव | उमापति और चेतना के स्वरूप | स्थिरता, सत्य और आत्मसंयम |
| उमा-महेश्वर | शिव-पार्वती का संयुक्त स्वरूप | समानता, संवाद और संयुक्त जिम्मेदारी |
4. मंगला तेरस और विजया पार्वती व्रत का संबंध
अनेक क्षेत्रीय व्रत-कैलेंडरों में आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी को मंगला तेरस तथा विजया पार्वती व्रत के आरंभ का दिन एक साथ बताया जाता है।
मंगला तेरस को एक-दिवसीय माता पार्वती पूजा के रूप में भी किया जाता है। वहीं विजया या जया पार्वती परंपरा कुछ समुदायों में पाँच दिनों तक चलती है।
दोनों में माता पार्वती, भगवान शिव, सौभाग्य, योग्य संबंध, परिवार के कल्याण और आत्मसंयम का भाव समान है।
परिवार में पाँच दिन की परंपरा हो तो 27 जुलाई को स्थापना करके निर्धारित समापन-दिन तक पूजा जारी रखें। केवल मंगला तेरस करने वाले 27 जुलाई को एक-दिवसीय व्रत और पूजा कर सकते हैं।
पाँच दिनों के व्रत का विस्तृत क्रम पढ़ने के लिए
जया या विजया पार्वती व्रत 2026
मार्गदर्शिका देखें।
5. माता पार्वती की तपस्या का पौराणिक प्रसंग
माता सती ने अगले जन्म में हिमालयराज हिमवान और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया।
बाल्यकाल से उनके मन में भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा थी। देवर्षि नारद ने उन्हें तपस्या और आत्मसंयम का मार्ग बताया।
माता पार्वती ने महल की सुख-सुविधाएँ छोड़कर दीर्घकाल तक साधना की। उनका तप केवल विवाह की इच्छा नहीं था; यह अपने मन, भय, इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण प्राप्त करने की साधना भी था।
भगवान शिव ने विभिन्न रूपों में उनके धैर्य और निर्णय की परीक्षा ली। माता पार्वती ने बाहरी रूप, संपत्ति और प्रतिष्ठा के बजाय शिव के ज्ञान, सत्य और आध्यात्मिक स्वरूप को महत्व दिया।
अंततः भगवान शिव ने उनकी साधना स्वीकार की। परिवार की सहमति और धार्मिक विधि से शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
मंगला तेरस की पूजा में इस प्रसंग का स्मरण करते हुए श्रद्धालु केवल संबंध की इच्छा नहीं, बल्कि सही व्यक्ति को पहचानने का विवेक, अपने निर्णय में धैर्य और संबंध निभाने की जिम्मेदारी माँगते हैं।
कथा की शिक्षा:
किसी संबंध का मूल्य बाहरी आकर्षण से नहीं, बल्कि सत्य, सुरक्षा, सहमति, संवाद और परस्पर सम्मान से निर्धारित होता है।
6. मंगला तेरस व्रत कौन रख सकता है?
अविवाहित श्रद्धालु
सम्मानपूर्ण, सुरक्षित और अनुकूल जीवनसाथी के साथ सही निर्णय-शक्ति की प्रार्थना कर सकते हैं।
विवाहित महिलाएँ
परिवार के कल्याण, जीवनसाथी के स्वास्थ्य और दांपत्य में संवाद का संकल्प ले सकती हैं।
विवाहित पुरुष
पत्नी पर अकेले व्रत का भार डालने के बजाय पूजा, भोजन और पारिवारिक जिम्मेदारियों में सहयोग कर सकते हैं।
बिना उपवास के
स्वास्थ्य कारण से भोजन लेते हुए भी दीपक, मंत्र, कथा और सात्त्विक व्यवहार से पूजा की जा सकती है।
7. घर पर 15 मिनट की सरल मंगला तेरस पूजा
- स्नान करके या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- शिव-पार्वती या माता गौरी का चित्र स्वच्छ चौकी पर रखें।
- घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश और गुरु का स्मरण करें।
- जल, अक्षत और पुष्प हाथ में लेकर आज की पूजा या व्रत का संकल्प लें।
- माता पार्वती को कुमकुम, अक्षत और लाल या उपलब्ध स्वच्छ पुष्प अर्पित करें।
- भगवान शिव को जल, चंदन और बिल्वपत्र अर्पित करें।
- फल, मिश्री या खीर का सात्त्विक नैवेद्य रखें।
- “ॐ पार्वत्यै नमः” 27 बार जपें।
- “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः” 11 बार जपें।
- माता पार्वती की तपस्या का प्रसंग या विजया पार्वती व्रत कथा पढ़ें।
- “जय पार्वती माता” आरती करके प्रसाद वितरित करें।
8. मंगला तेरस की विस्तृत पूजा-विधि
- पूजा-स्थान साफ करके चौकी पर लाल, गुलाबी, पीला या स्वच्छ हल्के रंग का वस्त्र बिछाएँ।
- माता पार्वती, गौरी या उमा-महेश्वर का चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाकर भगवान गणेश, कुलदेवी और गुरु का स्मरण करें।
- जल, अक्षत और पुष्प हाथ में लेकर स्वास्थ्य एवं परिस्थिति अनुसार व्रत का संकल्प लें।
- माता पार्वती को स्वच्छ जल, चंदन, कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- परिवार की परंपरा हो तो लाल चुनरी, चूड़ी या श्रृंगार सामग्री प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करें।
- भगवान शिव को जल, सफेद चंदन, भस्म और बिल्वपत्र अर्पित करें।
- धूप और घी का दीप अर्पित करें।
- खीर, फल, मिश्री या घर में बना सात्त्विक नैवेद्य रखें।
- “ॐ पार्वत्यै नमः” और “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
- माता पार्वती की तपस्या, शिव-विवाह या विजया पार्वती की कथा पढ़ें।
- अपने जीवन के किसी एक संबंध में सुधार का व्यावहारिक संकल्प लें।
- माता पार्वती की आरती करें।
- पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।
- प्रसाद परिवार में बाँटें और क्षमता अनुसार भोजन या उपयोगी वस्तु का दान करें।
शिवलिंग के अभिषेक का विस्तृत क्रम देखने के लिए
शिव पूजन एवं अभिषेक विधि
पढ़ें।
9. मंगला तेरस व्रत में क्या खाएँ?
मंगला तेरस के भोजन-नियम क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदलते हैं। कुछ श्रद्धालु फलाहार रखते हैं, कुछ एक समय सात्त्विक भोजन लेते हैं और कुछ केवल पूजा करते हैं।
कई क्षेत्रीय परंपराओं में माता को खीर अर्पित करके उसी प्रसाद से व्रत पूर्ण किया जाता है।
| व्रत का प्रकार | क्या ग्रहण कर सकते हैं? | किसके लिए? |
|---|---|---|
| फलाहार | फल, दूध, दही, नारियल पानी और मेवे | स्वस्थ गृहस्थों के लिए |
| एक समय भोजन | हल्का सात्त्विक घरेलू भोजन | कामकाजी एवं सक्रिय व्यक्तियों के लिए |
| खीर-प्रसाद परंपरा | पूजा में अर्पित खीर और हल्का भोजन | परिवार में यह रीति होने पर |
| सामान्य भोजन के साथ पूजा | दवा और पोषण सहित आवश्यक भोजन | गर्भवती, बुजुर्ग, बच्चे और रोगी |
स्वास्थ्य-सावधानी:
मधुमेह, रक्तचाप, गर्भावस्था, स्तनपान, किडनी, लिवर, भोजन-संबंधी विकार या नियमित दवा की स्थिति में भोजन और दवा न छोड़ें।
10. मंगला तेरस पूजा सामग्री
सामग्री कम हो तो:
शिव-पार्वती का चित्र, एक दीपक, जल, कुमकुम, अक्षत, पुष्प और “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्र से पूजा की जा सकती है।
11. मंगला तेरस के प्रमुख मंत्र और स्तुति
1. माता पार्वती नाम मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः॥
जप: 11, 27 या 108 बार।
2. गौरी मंत्र
ॐ गौर्यै नमः॥
अवसर: कुमकुम और पुष्प अर्पित करते समय।
3. उमा-महेश्वर मंत्र
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः॥
अवसर: शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा और संबंधों में संतुलन की प्रार्थना।
4. पंचाक्षरी शिव मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
अवसर: शिव अभिषेक या पूजा के अंत में 11 अथवा 108 बार।
5. मंगल स्तुति
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अवसर: पूजा के अंत में मंगल, विवेक और संरक्षण की प्रार्थना।
6. सरल हिन्दी प्रार्थना
हे माता पार्वती! मेरे जीवन में सत्य, विवेक और आत्मसम्मान बनाए रखें।
मेरे संबंधों में सुरक्षा, संवाद, सहमति और परस्पर सम्मान हो।
भगवान शिव के अन्य मंत्रों के अर्थ एवं जप-विधि के लिए
प्रमुख शिव मंत्र
पढ़ें।
12. मंगला तेरस पर माता पार्वती की आरती
॥ श्री पार्वती माता की आरती ॥
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥
॥ जय पार्वती माता ॥
सतयुग रूपशील अति सुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥
॥ जय पार्वती माता ॥
सृष्टि रूप तुही है जननी, शिव संग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
देवन अरज करत हम, चरण ध्यान लाता।
तेरी कृपा रहे तो, मन नहीं भरमाता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता।
नित सुखी रह करके, मंगल जीवन पाता॥
॥ जय पार्वती माता ॥
आरती पाठांतर:
अलग पुस्तकों और परिवारों में आरती की कुछ पंक्तियों में शब्द-भेद मिलते हैं। अपनी पारिवारिक आरती-पुस्तक का पाठ भी किया जा सकता है।
13. मंगला तेरस के आध्यात्मिक और व्यावहारिक उपाय
नीचे दिए उपाय प्रार्थना के साथ व्यवहार-सुधार और आत्मचिंतन के लिए हैं। इन्हें विवाह, संतान, धन या अन्य परिणाम की गारंटी न समझें।
विवाह को लेकर चिंता
माता को पुष्प अर्पित करके “ॐ पार्वत्यै नमः” 27 बार जपें। साथ में जीवनसाथी में अपेक्षित पाँच वास्तविक गुण और अपनी पाँच जिम्मेदारियाँ लिखें।
दांपत्य में संवाद की कमी
उमा-महेश्वर के सामने दीपक जलाकर सप्ताह में एक बार बिना मोबाइल और बिना बीच में टोके बातचीत का समय तय करें।
घर में बार-बार विवाद
पूजा के बाद घर के कार्य, खर्च और देखभाल की जिम्मेदारियों का स्पष्ट तथा न्यायपूर्ण विभाजन करें।
अधूरे वचन और जिम्मेदारियाँ
माता पार्वती के सामने किसी एक अधूरे वचन को पूरा करने या उसकी वास्तविक स्थिति संबंधित व्यक्ति को बताने का संकल्प लें।
संतान संबंधी चिंता
माता से प्रार्थना करें, लेकिन समय पर योग्य चिकित्सा सलाह भी लें। समस्या महिला या पुरुष किसी एक की गलती नहीं होती।
आत्मविश्वास की कमी
पाँच दिनों तक प्रतिदिन एक छोटा टाला हुआ कार्य पूरा करें। मंगल का अर्थ अपनी जड़ता और भय पर नियंत्रण प्राप्त करना भी है।
14. अलग-अलग श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी Tips
अविवाहित व्यक्ति
केवल शीघ्र विवाह नहीं, बल्कि सुरक्षा, सहमति, शिक्षा, आर्थिक दृष्टि और भावनात्मक अनुकूलता की प्रार्थना करें।
विवाहित दंपति
पूजा दोनों मिलकर करें और व्रत की तैयारी तथा घरेलू काम का भार एक व्यक्ति पर न डालें।
कामकाजी व्यक्ति
सुबह 15 मिनट पूजा करके जाएँ। शाम को केवल आरती, नैवेद्य और प्रसाद का क्रम रखें।
विद्यार्थी
भोजन छोड़कर पढ़ाई प्रभावित न करें। माता से विवेक माँगकर नियमित अध्ययन का संकल्प लें।
बुजुर्ग श्रद्धालु
बैठकर मानसिक पूजा और मंत्र-जप करें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें।
यात्रा में
मोबाइल पर चित्र देखकर मानसिक जप करें। वाहन, होटल या सार्वजनिक स्थान में असुरक्षित खुली लौ न जलाएँ।
15. मंगला तेरस पर क्या करें और किन बातों से बचें?
क्या करें?
किन बातों से बचें?
16. मंगला तेरस 2026 का सरल दिनभर का कार्यक्रम
| समय | सुझाया गया क्रम |
|---|---|
| सुबह 5:39–7:21 | स्नान, संकल्प, दीपक, माता पार्वती पूजा और मंत्र-जप |
| सुबह 7:21–9:03 | राहुकाल; नई स्थापना टालें, सामान्य जप किया जा सकता है |
| सुबह 9:03–10:45 | विस्तृत पूजा, कथा, स्तुति और आरती |
| दोपहर 12:00–12:54 | समय कम हो तो अभिजित काल में संक्षिप्त पूजा |
| दोपहर 3:51–4:15 | त्रयोदशी समाप्त होने से पहले अंतिम संक्षिप्त पूजा या पुष्पांजलि |
| शाम | परिवार की परंपरा अनुसार आरती, खीर-भोग, प्रसाद और व्रत-समापन |
17. मंगला तेरस 2026 Checklist
पूजा से पहले
पूजा के दौरान
पूजा के बाद
19. मंगला तेरस 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. मंगला तेरस 2026 कब है?
2. नई दिल्ली में त्रयोदशी कब से कब तक है?
3. पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
4. क्या मंगला तेरस मंगलवार को होती है?
5. मंगला तेरस की मुख्य देवी कौन हैं?
6. क्या मंगला तेरस और प्रदोष एक ही दिन हैं?
7. क्या मंगला तेरस और विजया पार्वती व्रत एक हैं?
8. मंगला तेरस की कथा किस पुराण में है?
9. मुख्य मंत्र कौन-सा है?
10. माता को क्या भोग लगाएँ?
11. क्या लाल चुनरी और चूड़ी अनिवार्य हैं?
12. क्या पुरुष मंगला तेरस की पूजा कर सकते हैं?
13. क्या उपवास रखना आवश्यक है?
14. क्या व्रत शाम को खोल सकते हैं?
15. क्या मंगला तेरस से विवाह निश्चित होता है?
16. क्या संतान की प्रार्थना की जा सकती है?
17. मासिक धर्म में पूजा कैसे करें?
18. मंदिर नहीं जा सकें तो क्या करें?
19. क्या मंगला तेरस के उपाय निश्चित फल देते हैं?
20. निष्कर्ष
मंगला तेरस 2026 सोमवार, 27 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी पर मनाई जाएगी।
नई दिल्ली में त्रयोदशी शाम 4:15 बजे तक रहेगी। मुख्य पूजा सुबह 5:39 से 7:21 या सुबह 9:03 से 10:45 बजे की जा सकती है।
इस पर्व की मुख्य उपास्य माता पार्वती का मंगलकारी गौरी स्वरूप है। भगवान शिव की संयुक्त पूजा भी की जाती है।
मंगला तेरस का विजया या जया पार्वती व्रत से निकट क्षेत्रीय संबंध है, लेकिन इसे मंगलवार के मंगला गौरी व्रत या 26 जुलाई के रवि प्रदोष से नहीं मिलाना चाहिए।
सरल पूजा के लिए शिव-पार्वती का चित्र, दीपक, जल, कुमकुम, अक्षत, पुष्प और “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्र पर्याप्त हैं।
इस व्रत का व्यावहारिक संदेश है—संबंधों में सम्मान, अपनी जिम्मेदारियों का पालन, सही निर्णय में धैर्य और परिवार में सहयोग।
माता पार्वती से केवल शुभ परिणाम नहीं, बल्कि शुभ निर्णय और शुभ आचरण की शक्ति भी माँगें।
जय माता गौरी
धार्मिक, पंचांग और स्वास्थ्य अस्वीकरण
तिथि, सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया नई दिल्ली के आधार पर दिए गए हैं। अन्य शहरों और देशों में समय बदल सकता है।
मंगला तेरस क्षेत्रीय व्रत-परंपरा है। इसकी पूजा, कथा, भोजन और समापन-विधि परिवार तथा समुदाय के अनुसार बदल सकती है।
मंगला तेरस नाम से किसी एक सर्वमान्य पुराण का स्वतंत्र अध्याय सामान्यतः उपलब्ध नहीं है। माता पार्वती की तपस्या का प्रसंग पौराणिक परंपरा पर आधारित है।
2026 में रवि प्रदोष 26 जुलाई और मंगला तेरस 27 जुलाई को है। दोनों की पूजा का समय अलग है।
गर्भावस्था, मधुमेह, रक्तचाप, किडनी, लिवर, भोजन-संबंधी विकार या नियमित दवा की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह के बिना उपवास न करें।
विवाह में कानूनी आयु, दोनों व्यक्तियों की स्वतंत्र सहमति, सुरक्षा और वास्तविक अनुकूलता आवश्यक है। धार्मिक व्रत किसी पर विवाह का दबाव डालने का आधार नहीं है।
संतान संबंधी कठिनाई महिला या पुरुष किसी एक की गलती नहीं होती। आवश्यकता होने पर दोनों साथियों को योग्य चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
मंत्र, आरती, व्रत और आध्यात्मिक उपाय विवाह, संतान, धन, स्वास्थ्य या अन्य परिणाम की निश्चित गारंटी नहीं हैं।